Breaking News

महिलाएं क्यों पहनती हैं नथ?


श्रृंगार
कभी-कभी मन में यह सवाल आता है कि सबसे पहले गहने पहनने का रिवाज़ कब शुरू हुआ होगा? शायद तब जब मानव जाति ने विभिन्न धातुओं की खोज की, तभी तो गहने बन पाए होंगे। या फिर उससे पहले भी गहने पहने जाते थे? क्योंकि एक जमाना वह भी था जब महिलाएं फूल-पत्तियों जैसी प्राकृतिक वस्तुओं से भी श्रृंगार करती थीं। लेकिन जब हम देवी-देवताओं की प्राचीन ग्रंथों में बनी तस्वीरें देखते हैं, तो लगता है कि शायद आभूषण जैसी वस्तुएं तब भी मौजूद थीं।

आभूषण और महिलाएं
लेकिन यह तस्वीरें कितने स्तर तक सच्चाई दिखाती हैं या महज़ काल्पनिक हैं यह कहना मुश्किल है। तो फिर कैसे माना जाए कि आभूषण पहनने का रिवाज़ कब शुरू हुआ? खैर वक्त कोई भी रहा हो, लेकिन इन आभूषणों ने महिलाओं की सुंदरता को निखारा जरूर है।

आभूषण का महत्त्व
आभूषण पहनने से एक महिला खुद को पूर्ण मानती है, खासतौर से भारत जैसे देश में गहनों का महिलाओं से एक गहरा रिश्ता देखा जाता है। यहां की महिलाएं कितनी ही मार्डर्न क्यों ना हो जाएं, लेकिन आभूषणों से कहीं ना कहीं जुड़ी रहती हैं। कान की बाली से लेकर हाथ में पहनी चूड़ी या फिर माथे का टीका। सभी महिलाओं के श्रृंगार का एक खास हिस्सा माने जाते हैं।

रीति-रिवाज़ और आभूषण
कई बार ये आभूषण रीति-रिवाज़ों के नाम पर भी पहने जाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि विशेष प्रकार के गहने ना केवल रिवाज़ की दृष्टि से अहम माने जाते हैं, बल्कि साइंस ने भी इन्हें पहनने के पीछे कई कारण दिए हैं।

फैशन सेंस
इससे पहले हमारे द्वारा हाथों में चूड़ियां पहनने और पांव की अंगुलियों में बिछिया पहनने के लाभ पर चर्चा की गई थी। जिसके अनुसार चूड़ियां एक महिला के आसपास मौजूद नकारात्मक ऊर्जा को काटकर, सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह करती हैं। चूड़ियों की आवाज़ के कारण ही अच्छी ऊर्जा की उत्पत्ति होती है।

पांव की बिछिया
इसके अलावा यदि पांव की बिछिया की बात की जाए, तो इस बिछिया का संबंध महिलाओं के गर्भाशय से माना गया है। साइंस ने खुद यह माना है कि पांव की जिस अंगुली में बिछिया पहनी जाती है उसका संबंध सीधा महिला के गर्भाशय से होता है। इस बिछिया को पहनने से महिला की प्रजनन शक्ति बढ़ती है।

नथ के फायदे
इसी तरह से क्रम में आगे बढ़ते हुए आज हम आपको महिलाओं द्वारा नाक में पहने जाने वाली ‘नथ’ के फायदे बताएंग। इस नथ को पहनने का कारण क्या है, क्या रिवाज़ है, इससे स्वास्थ्य को क्या लाभ मिलते हैं, यह सभी जानकारी आगे की स्लाइड्स में बताई जा रही है.....

नाक में कील या नथ
भारतीय महिलाओं द्वारा नाक में कील या नथ पहना जाना काफी आम और पुरानी परंपराओं में से एक माना जाता है। चाहे वह हिंदू धर्म हो या फिर कोई दूसरा धर्म, लड़कियां अपनी नाक जरूर छिदवाती हैं। आजकल तो नाक में कील पहनने का फैशन सा बन गया है।

फैशन
चलिए यह तो थी फैशन की बात, लेकिन नाक की नथ भारतीय समाज में कितनी अहमियत रखती है यह वह महिलाएं जरूर जानती हैं जो अपनी संस्कृति से आज भी जुड़ी हुई हैं। एक प्रचलित रिवाज़ के अनुसार नाक की नथ शादीशुदा महिलाओं के लिए सौभाग्य का प्रतीक मानी जाती है।

क्या हैं फायदे
नथ पहनने के पीछे हर महिला की अलग-अलग वजह हो सकती है लेकिन भारत में नोज रिंग के महत्व की तमाम वजहें हैं। इसे पहनने के पीछे कुछ ऐतिहासिक तथ्य भी मौजूद हैं, जो इस विशेष आभूषण के अस्तित्व में आने की पैरवी करते हैं।

मान्यताएं
कुछ मान्यताओं के अनुसार, नाक के छल्लेू का प्रचलन मध्यह पूर्व से प्रारंभ हुआ और फिर 16वीं सदी में मुगल काल के दौरान भारत में भी आ पहुंचा। कहते हैं कि मुगल घराने की महिलाएं नाक में नथ पहनने को बेहद महत्वपूर्ण मानती थीं। इसके बिना उनका श्रृंगार अधूरा माना जाता था।

रिवाज़
यहीं से आगे बढ़कर यह रिवाज़ भारत के कोने-कोने में पहुंचा। आज आप शादियों में खासतौर से नाक में नथ पहने हुए वधुओं को देख सकते हैं। उत्तरी भारत में भले ही आपको नाक में नथ पहनी या कील पहनी महिलाएं कम दिखाई दें, लेकिन कुछ नीचे आने पर महाराष्ट्र में मराठी महिलाएं नाक में नथ को बेहद जरूरी मानती हैं।

मराठी महिलाओ की नथ
इनकी नाक की नथ काफी सुंदर भी होती है, यह आकार में बड़ी एवं मोतियों से जड़ी होती है। भारत के दक्षिणी छोर की बात करें तो दक्षिण भारतीय महिलाएं भी नाक में नथ पहनती हैं। बस नाक एक दाईं ओर पहनना है या बाईं ओर, यह विभिन्न संस्कृति पर निर्भर करता है।

हेल्थ के लिए
चलिए यह तो थे रिवाज़ की दृष्टि से नथ पहनने के कारण, लेकिन साइंस ने नाक में नथ पहनना जरूरी क्यों माना है, यह भी जान लीजिए...

स्वास्थ्य लाभ
आयुर्वेद के अनुसार कहा गया है कि अगर नाक के एक प्रमुख हिस्से वाली जगह पर छेद किया जाए तो मासिक धर्म के समय उस महिला को कम दर्द झेलना पडेगा। इसका कारण वैज्ञानिकों ने नाक की कुछ नसों का एक स्त्री के गर्भ से जुड़ा हुआ बताया है।

बाई ओर की नाक छेदी जाती है
इसलिए लड़कियों की बाई ओर की नाक छेदी जाती है क्योंकि उस जगह की नसें नारी के महिला प्रजनन अंगों से जुडी हुई होती हैं। नाक के इस हिस्से पर छेद करने से महिला को प्रसव के समय भी कम दर्द का सामना करना पड़ता है।

सांस्कृतिक महत्व
लेकिन आज के ज़माने में आमतौर से नाक की नथ पहनने का क्या महत्व रह गया है, यह भी जान लीजिए। नाक की नथ धर्म के हिसाब से महिला को 16 साल की उम्र के बाद तक अपनी नाक जरुर छिदवा लेनी चाहिये। नाक की नथ कई संस्कृकति में विवाह होने का संकेत भी होता है।

एक रिवाज़
हिंदू धर्म में जिस महिला का पति मृत्युथ को प्राप्त हो जाता है, उसकी नथ को उतार दिया जाता है। इसके अलावा हिंदू धर्म के अनुसार नथ को माता पार्वती को सम्मान देने के लिये भी पहना जाता है।

अन्धविश्वास
लेकिन इससे इतर कुछ ऐसी मान्यताएं भी प्रचलित हैं जो सुनने में बुरी जरूर लगती हैं, लेकिन फिर भी लोग इनका पालन अवश्य करते हैं। एक ऐसी ही मान्यता या फिर यूं कहें कि प्रचलित अंधविश्वास के अनुसार, शादीशुदा महिला अगर नाक से सीधी हवा अंदर ले तो यह उसके पति के स्वास्थ्य के लिये खतरा हो सकता है।

भारत के पूर्वी हिस्से में प्रचलित
इसलिये वह नाक में नाक की कील या नथ पहनती है, जिससे कि हवा पहले उस धातु से टकराए और बाद में वह उसे अंदर खींचे। यह अंधविश्वास भारत के पूर्वी हिस्से में प्रचलित है, जहां आज भी इसका पालन करना अति अवश्यक माना जाता है।