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क्या आपको पता है सौंफ के औषधीय गुणों के बारे में, Medicinal properties of fennel


भोजन संपन्न होने के बाद खाना पचाने के लिए खाई जाने वाली सौंफ गजब के औषधीय गुणों वाली होती है। सौंफ को लगभग हर भारतीय घरों में किचन में मसाले की तरह और पानदान मुखवास की तरह देखा जा सकता है। सौंफ का वानस्पतिक नाम फीनीकुलम वलगेयर है।

सौंफ में कैल्शियम, सोडियम, फास्फोरस, आयरन और पोटेशियम जैसे कई अहम तत्व पाए जाते हैं। सुदूर आदिवासी अंचलों में सौंफ को अनेक हर्बल नुस्खों के तौर पर अपनाया जाता है, चलिए आज जानते हैं सौंफ से जुड़े कुछ आदिवासी हर्बल नुस्खों को...
रक्त अल्पता के रोगी अनंतमूल, दालचीनी और सौंफ की समान मात्रा लेकर चाय के साथ उबालकर कम से कम दिन में एक बार सेवन करें, तो रक्त शुद्धी के साथ-साथ रक्त बनने की प्रक्रिया में तेजी आती है।

दो चम्मच कच्ची सौंफ और 5 ग्राम अदरख एक ग्लास पानी में डालकर उसे इतना उबालें कि एक चौथाई पानी बच जाए। एक दिन में 3-4 बार लेने से पतला दस्त ठीक हो जाता है। गैस और कब्ज में भी लाभदायक होता है।

सौंफ, मिश्री व धनिया की समान मात्रा लेकर चूर्ण बना कर 6-6 ग्राम प्रतिदिन भोजन के बाद खाने से हाथ पैर की जलन, एसिडिटी, आँखों की जलन, पेशाब में जलन व सिरदर्द दूर होता है।

आदिवासी मानते है कि परवल के फलों का जूस तैयार कर लिया जाए और इसमें करीब 4 ग्राम सौंफ के दाने और चुटकी भर हींग का पिसा हुआ चूर्ण मिला लिया जाए और सेवन किया जाए तो मोटापा दूर होने लगता है।

आदिवासियों का मानना है कि सौंफ के निरन्तर उपयोग से आखों की रौशनी बढती है और मोतियाबिन्द की शिकायत नहीं होती। आँखों की रौशनी को बेहतर करने के लिए आदिवासी सौंफ के चूर्ण को पानी में घोलकर पीने की सलाह भी देते हैं।

प्रतिदिन दिन में तीन से चार बार सौंफ के बीजों की कुछ मात्रा चबाने से खून साफ होता है और त्वचा का रंग भी साफ हो जाता है। सौंफ के पानी से चेहरे की सफाई करने से चेहरे से दाग दूर होने लगते हैं।

डाँग गुजरात के अनुसार सौंफ के रोजाना सेवन से शरीर पर चर्बी नही चढती और कोलेस्ट्राल भी काफी हद तक काबू किया जा सकता है और इस बात की प्रमाणिकता आधुनिक विज्ञान भी साबित कर चुका है।

अपचन और खाँसी होने की दशा में एक कप पानी में एक चम्मच सौंफ को उबालकर दिन में 3 से 4 बार पिया जाए तो समस्या समाप्त हो जाती है।

हाथ-पांव में जलन की शिकायत होने पर सौंफ के साथ बराबर मात्रा में धनिया के बीजों और मिश्री को कूट कर खाना खाने के पश्चात 5-6 ग्राम मात्रा में लेने से कुछ ही दिनों में आराम हो जाता है।