Breaking News

भूमि आंवला लिवर व high BP का बेजोड़ टॉनिक


प्रकृति का ऐसा विधान है कि जिस मौसम के जो रोग विशेष होते हैं, हमें उनकी  वनौषधियाँ भी उपलब्ध  कर देती है. भूमि आंवला – लिवर व high BP का बेजोड़ टॉनिक इसका एक सटीक उदाहरण है.

गर्मियों और बरसात के मौसम में हमारी पाचन शक्ति कमज़ोर हो जाती है. और हमारी लिवर कार्यक्षमता भी मंद पड़ जाती है.  इस मौसम में यदि हम लिवर की पसंदीदा वनस्पतियाँ लें तो पेट की गड़बड़ या लिवर रोग जैसे पीलिया (Jaundice) इत्यादि का कोई भय नहीं रहता.

भूमि आंवला (Bhumi anwla या amla), भुई आंवला या भू-आमलकी (Phylanthus amarus व Phylanthus niruri) एक ऐसी रामबाण वनौषधि है जो हमारे लिवर को अति प्रिय है.
भारत में पाया जाने वाला भूमि आंवला का सही वानस्पतिक नाम Phylanthus niruri न होकर Phylanthus amarus है, ऐसा वनस्पति विज्ञानियों का मत है.

भूमि आंवला बरसात के मौसम में लगभग पूरे भारतवर्ष में दिख जाता है. ये लगभग 1.5 फीट से 2 फीट ऊंचा एक वर्षीय पौधा होता है जो बरसात के समय खेतों में खरपतवार के रूप में उगता दिखाई देता है।

यद्यपि आंवला की तुलना में यह पौधा बहुत छोटा होता है परन्तु आवंला के पौधे जैसे पत्तों तथा पत्तों के पीछे नीचे छोटे-छोटे आंवला जैसे फल लगने के कारण संभवतया इसको जमीन का आंवला अथवा ‘भुंई आमला’ कहा जाता है।
क्यों है भूमि आंवला – लिवर व high BP का बेजोड़ टॉनिक
भुंई आमला का सम्पूर्ण पंचांग (जड़, तना, पत्ती, पुष्प, फल) औषधीय उपयोग का होता है।  आयुर्वेद व लोक परंपराओं के अनुसार इसे लिवर संबंधित विकारों विशेषतया पीलिया तथा हैप्टीटाइटस-बी के उपचार हेतु प्रयुक्त किया जाता है।
इसके पत्तों में पौटाशियम की काफी अधिक मात्रा (लगभग 0.83 प्रतिशत) होने के कारण यह काफी अधिक मूत्रल (Diuretic) है।

लिवर संबंधी विकारों के साथ-साथ भुंई आमला उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure), बुखार, मधुमेह (Diabetes) , घमौरिया, आंखों की बीमारियों, खुजली तथा चर्मरोगों, फोड़ों, पेशाब से संबंधित विकारों जैसे पेशाब में खून आना, पेशाब में जलन होना आदि के उपचार के लिये भी प्रयुक्त किया जाता है।
इसकी जड़ों से उपयोगी टांनिक बनाया जाता है जिसे पुरानी कब्ज में प्रयुक्त किया जाता है।

इसके मुख्य घटक फाइलेन्थिन तथा हाईपोफाइलेन्थिन हैं तथा इसकी सूखी शाक में फाइलेन्थिल तत्व की मात्रा 0.4% से 0.5% तक होती है। निःसंदेह भुंई आवला एक प्रभावशाली औषधीय उपयोग का पौधा है विशेष रूप से हैप्टीटाइस-बी जैसी जानलेवा बीमारियों के उपचार में प्रभावी सिद्ध होने के कारण इस पौधे की उपयोगगिता और भी बढ़ गई है।

कैसे करें उपयोग
लगभग आधा किलो भूमि आंवला के पौधे जड़ समेत उखाड़ लें.
पानी से अच्छी तरह धो लें जिससे मिटटी इत्यादि निकल जाए.
इन पौधों को इस प्रकार थोडा मोटा मोटा काट लें कि प्रेशर कुकर में डाल सकें. कृपया ध्यान रखें, इसे आपने जड़ तने समेत ही काटना है, जिसे पंचांग कहते हैं
इस शाक नुमा भूमि आंवला को प्रेशर कुकर में तीन लीटर पानी के साथ डाल दें.
एक चम्मच हल्दी, एक चम्मच अदरक व स्वादानुसार थोडा नमक भी डाल दें. यदि पीलिया में उपयोग करना है तो नमक की जगह चीनी डालें.
एक सीटी लगायें व चूल्हे से हटा दें. बिना ढक्कन खोले करीब दस मिनट पड़ा रहने दें. फिर एक सीटी लगाएं व थोडा ठंडा होने दें. इस प्रकार तीन या चार सीटी लगाने के बाद कुकर की भाप बैठ जाने पर खोल लें.
इस काढ़े (Decoction) को छान लें. बोतल में भर कर फ्रिज में रख लें.
भूमि आंवला का बेहतरीन लिवर टॉनिक तैयार है. तीन सप्ताह तक खराब नहीं होगा.
सेवन विधि व मात्रा
इस काढ़े का लगभग आधा कप ले कर उतना ही पानी मिलाकर थोडा dilute कर लें. चाहें तो नीम्बू मिला सकते हैं.
दिन में दो या तीन बार लें. परिणाम एक दिन बाद ही महसूस होने लग जायेंगे.
Jaundice या लिवर के अन्य रोगों में इसकी मात्रा दोगुनी कर देनी चाहिए व लेना भी चार से पांच बार चाहिए.
आपके सन्दर्भ के लिये, घर पर बनाए गए भूमि आंवला के काढ़े (Decoction) का चित्र नीचे दिया है.

सारशब्द
भूमि आंवला एक मुफ्त की वनस्पति है जो अति उत्तम लिवर टॉनिक व high BP की बेजोड़ औषधि है. यह पेट के कई रोगों में भी हितकारी है.
यदि हम गर्मियों और बरसात में इस वनौषधि का उपयोग करते हैं तो high BP, लिवर व पेट के कई रोगों से बचा जा सकता है.

कोई टिप्पणी नहीं